कल्पनाशब्दों के बीच
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लिखना

लिखना..... मैं उन लोगों के लिए नहीं लिखती जो पढ़कर मुझे जज करते हैं बल्कि उन लोगों के लिए लिखती हूँ जो मुझे पढ़ते हैं ....उस पल अपने प्रेम को याद करते हैं ...बस मुस्कुराते हैं और मुझे भूल जाते हैं। मेरी अगली पंक्ति का इंतजार भले न करते हों पर अगर मिल जाये तो मेरे प्रेम से अपने प्रेम का मिलान जरूर करके देखते हों।एक चेहरा उभर आता हो आंखों में। सबका प्रेम एक सा कभी नहीं होता। निश्चिन्त रहिये । प्रेमिल लोग मेरी मुस्कान रख लें । खडूस तुम मेरे शब्द।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें