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पिछले कई महीनों से साइटिका के भयंकर दर्द से परेशान थी। घर…

पिछले कई महीनों से साइटिका के भयंकर दर्द से परेशान थी। घर के काम में मदद करने के लिए मेरी मेड है जिसका नाम शिउली है। वो मेरे पूरे घर की देख भाल करती है । बर्तन ,डस्टिंग ,झाड़ू पोछा , ये तीन ही काम उसके जिम्मे थे। जब दर्द ज्यादा बढ़ गया तो एक दिन उसने कहा दीदी आप ज्यादा देर किचन में खड़े मत रहा करो। मैं किचन का काम कर दूंगी। तब से बिना कहे अब तक वो रोज किचन में सब्जी काट कर , आटा गूंथ कर , किचन पूरा समेट कर जाती है। उस रोज़ मेरा मन उसके प्रति अपार स्नेह और थैंक यू से भर गया कि उसको मेरे कहे बिना मेरा दर्द महसूस हुआ। प्रेमिल मन किसी का भी हो ....हाथ बढ़ाए तो सामने वाला फिदा हो ही जाता है। दर्द बांटना सब को कहां आता है? कल बातों बातों में मैंने कहा शिउली कितनी ठंड है ।उसने कहा दीदी आपका घर तो बंद है ।मेरे घर में तो इतनी ठंडक है कि क्या कहूं। रात भर पैर गरम नहीं होते। मेरी बेटी तो ठंड के मारे बहुत परेशान होती है। मुझे पता नहीं क्यों दिल में टीस सी उठी। सफाई करते हुए बेड पर पड़े waterbag को छू कर बोली ये अच्छा है ...गरम गरम बिजली का बिल भी नहीं आएगा और गरम भी रहेगा। मुझे लगा ईश्वर ने मुझे इशारा दिया है.... मेरे पास एक water bag नया रखा था। महीने की तनख्वाह के साथ उसे देकर कहा इसे ले जा । कुछ तो राहत मिलेगी तुझे। वो बहुत खुश होगई।बोली दीदी मैंने तो ऐसे ही कहा था। शाम को जब फिर आई तो बोली दीदी मेरी बेटी ने आपको थैंक यू कहा है। वाटर bag चिपका कर सोई है। मैं सोचने लगी.... Thank u भी कितना जादुई शब्द है। अनसुने दर्द कोई सुन ले तो ईश्वर याद आते हैं । आसपास उनका होना मुझे महसूस होता है। एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव ही जीवन है । *तस्वीर में किताबों के साथ मेरा *थैंक यू* पड़ा है। Water bag filled with warmth and blessings.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें