कल्पनाशब्दों के बीच
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हमारी उपस्थिति क्षण भर के लिए है । प्रेम किसी दूसरे की उपस…

हमारी उपस्थिति क्षण भर के लिए है । प्रेम किसी दूसरे की उपस्थिति को नहीं उसकी अनुपस्थिति को ढूंढने में है । दो कम होती उपस्थितियां एक बड़ी अनुपस्थिति को जन्म देती हैं । प्रेम ढूंढे नहीं मिलता तब। किसी मनचाही अनुपस्थिति को तो तब भी टाला जा सकता है पर किसी मनचाही उपस्थिति को नकारना प्रेम के बस में नहीं। मेरी अनुपस्थिति पर तुम्हारी अनुपस्थिति की छाया भर पड़ती रहे। मैं तब भी महक जाती हूं। तुम्हारी अनुपस्थिति ने मोहा है मुझे.... Let me paint Let me draw Let me carve your absence ... I wish ... I could feel my presence in absentia
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें