कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4081

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इतना कुछ तो किया इस साल

इतना कुछ तो किया इस साल .... कम जिये...ज्यादा सीखा कीमत जानी ... हर पल फ़ानी कम जताया ...कम निभाया कम खर्च हुए.... ज्यादा बचे.. ठहरना सीखा ... रुक कर पलटना पलटकर आगे देखा कम कम बसंत में भीगे ज्यादा ज्यादा पतझड़ निचोड़ा कायदे वायदे फायदे सब कम रहे कम लौटे ....कम पहुँचे ज्यादा रूठे.. कम मनाए गए दुआ दी ज्यादा ... छुआ कम बहुत कम नई गाठें सीखी पुरानी बखिया उधेड़ी प्रेम तोड़ा मरोड़ा कम सपाट रहे खूब चाहा याद के पेड़ लगाए एक दिन में कई भी कई बार भी पर... हर बार कच्चे टूटे बोले ...तस्वीरों से बेइंतेहा सोचा इततु इततु जिए पर मुस्कुराए और बस लिखा..... तुम्हें
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें