कल्पनाशब्दों के बीच
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दो ठंडे शहरों के बीच इक मुलायम स्वेटर आसानी से बनता उधड़ता…

दो ठंडे शहरों के बीच इक मुलायम स्वेटर आसानी से बनता उधड़ता रहता है । तुम्हारे मेरे हाथ उलझे सुलझे ऊनी गोले हैं। हर रंग के कोसे कोसे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें