भाषा / Language
अगर नदी प्यासी रह जायेगी तो समंदर भी रेत से भर जाएगा।
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*अगर नदी प्यासी रह जायेगी तो समंदर भी रेत से भर जाएगा।
पल्लवित होने के लिए प्लावित होना ही होगा
प्रेमी मग्न नहीं .....जलमग्न रहें।
*तुम्हारे बिना मैं क्या करूँगी?
मेरे बिना तुम भी क्या कर सकते हो?
हम दोनों के बिना ईश्वर भी कुछ नहीं करेगा।
मैं और तुम दो बिंदुओं से बने त्रिकोण हैं ....
ईश्वर हमारे लिए थोड़े ही अदृश्य- अस्पृश्य है।
वो साधेगा न हमारा कोण ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें