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प्रेम से बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं

प्रेम से बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं ... मैंने तुमको चुना है। हर दीवार तुमको ही संभालनी और गिरानी है । सब्र और उदासी दे सकता हूँ ... यही बचता है इश्क़ के पास।रख लो *प्रेम की एक रोज़ प्रेमी को लिखी पुरची जो प्रेमिका के हाथ लग गई। मन बचता कहाँ है ? और अगर बचता है तो बचता कहाँ है?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें