कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4043

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सही सही इश्क़ लिखा ही नहीं जा सकता

सही सही इश्क़ लिखा ही नहीं जा सकता... कभी मात्रा रह जाती है... कभी विराम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें