कल्पनाशब्दों के बीच
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बिना लिखे भी लिख सकती हूँ तुम्हारा नाम

बिना लिखे भी लिख सकती हूँ तुम्हारा नाम...... देखा.... पढ़ लिया न तुमने 😊 *एक ही सौंधी बात को हर मौसम में अलग अलग तरह से कह देना भी प्रेम है। बने रहें .....बातों में प्रेम में ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें