भाषा / Language
एक ही उसूल ज़िंदा रखा है
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एक ही उसूल ज़िंदा रखा है...
क़ैद से कहीं ऊपर परिंदा रखा है।
भूल भी जाओ तो लौटने न पाओ...
इस शहर का नाम बाशिंदा रखा है।
मेरी उदासी पर जो नई हँसी मढ दे
उसने इश्क़ को नया करिंदा रखा है
प्यार और प्यारे सी कोई बात नहीं
मैंने एक ही शख़्स चुनिंदा रखा है।
शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें