भाषा / Language
ज़ेहन कुछ तलाश रहा
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ज़ेहन कुछ तलाश रहा....
तुम्हारा नाम ले लूँ क्या ?
अगर कहूँ....
मेरी आँखों में तितलियां बंधी हैं और इन अंगुलियों में जुगनू
तुमको मुझमें बची चिड़िया को उड़ा ले जाना है।
सिर्फ़ तुमको .....
मानोगे कहा ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें