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रचना 4019

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ज़ेहन कुछ तलाश रहा

ज़ेहन कुछ तलाश रहा.... तुम्हारा नाम ले लूँ क्या ? अगर कहूँ.... मेरी आँखों में तितलियां बंधी हैं और इन अंगुलियों में जुगनू तुमको मुझमें बची चिड़िया को उड़ा ले जाना है। सिर्फ़ तुमको ..... मानोगे कहा ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें