कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4009

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कुछ इस कदर वाकिफ़ है वो मेरे जज़्बातों से

कुछ इस कदर वाकिफ़ है वो मेरे जज़्बातों से बस "माँ" .....कहता है ठग लेता है ......अपनी बातों से तुम दोनों को भी बच्चा दिवस मुबारक मेरे बच्चों शैतानियां सदा रहें मासूमियत कम न होने पाए। मन की सुनो मन ही चुनो तस्वीर तीन चार साल पुरानी हैं। भव्या का मेलबर्न से आना हुआ नहीं .... दक्षु छोटे का छोटा बना हुआ है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें