कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3992

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उससे मिलने के बाद लगा मोह बारिश का नहीं बून्द से किया जाना…

*उससे मिलने के बाद लगा मोह बारिश का नहीं बून्द से किया जाना चाहिए। *तुम मुझे शुद्ध कर देते हो... मैं अपनी सारी उदासी भूल जाती हूँ तुम से मिलकर *मेरी हाँ और ना भी तुम्हारे पास है.... मैं आदी हूँ तुम्हारी खामोशियों की। *मैं अपनी तरफ का कलमा पढ़ चुकी.... अब कुबूल होने तक का सब्र पढ़ती रहूँगी। *अपनी उदासी कहाँ रखते हो? मुझे वहां से अपना मलबा उठाना है। *तुम्हें जी लेने का डर तुम्हें मुझमें दिलचस्प बनाये रखता है। तुम न हुए मेरे तो क्या .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें