भाषा / Language
तुम्हें देखती ,सुनती, पढ़ती हूं तो लगता है *एक* का कितना म…
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तुम्हें देखती ,सुनती, पढ़ती हूं तो लगता है *एक* का कितना महत्व है ।
*एक* को कितना तो चाहा जा सकता है .....
*एक* में कितना तो अनंत रहा जा सकता है।
कितनी देर तक तका जा सकता है वो *एक*
कितनी तरह से लिखा जा सकता है वो *एक*
तुम सा प्यारा फूल कभी नहीं हुआ....एक पंखुरी वाला
अमृता जी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें