कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3979

भाषा / Language

दो निर्मल मन एक दूजे में निर्वात ढूंढते हैं

दो निर्मल मन एक दूजे में निर्वात ढूंढते हैं ..... इस निर्वात को स्पंदित करते हैं । इस सांझी निर्मलता को प्रेम कहते हैं ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें