कल्पनाशब्दों के बीच
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बहुत ज्यादा याद बहुत कम लोगों की आती है

बहुत ज्यादा याद बहुत कम लोगों की आती है ... और यही कम लोग ज्यादा दुख देते हैं *मोह में होम हो जाना ही प्रेम है। स्कूल जा रही। गीत सुनकर मुस्कान आ रही। रख लो। दोनों तुम्हारे हैं। दिन शुभ रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें