कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3946

भाषा / Language

बेचैनियों पर लगा पराग कण है प्रेम

बेचैनियों पर लगा पराग कण है प्रेम उड़ता रहता है.... कभी उग भी जाता है बेलौस *एक से दो मन ढूंढती हूँ.... मिलना😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें