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जिन आँखों में कविता भरी हो वो कभी झूठ नहीं बोल सकती

जिन आँखों में कविता भरी हो वो कभी झूठ नहीं बोल सकती .... वैसे आईना भी गौर से देखती हूँ तो छोटी बड़ी कविता चेहरे पर उभर आती हैं... जैसे तिल जैसे लकीरें जैसे झुर्रियां जैसे मुस्कान जैसे मायूसी 😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें