कल्पनाशब्दों के बीच
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इतना प्रेमी तो तुझे कर ही दूँगी कि मैं इधर मुस्कुरा दूँ तो…

इतना प्रेमी तो तुझे कर ही दूँगी कि मैं इधर मुस्कुरा दूँ तो उधर तेरे होंठ भी हिलें। ज़िन्दगी गुलज़ार होती नहीं.... रखनी पड़ती है। रखो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें