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गिरे हरश्रृंगार इस लिए खूबसूरत हैं

गिरे हरश्रृंगार इस लिए खूबसूरत हैं.... कि गिरना जानते हैं गिर कर धरा को ढांकना जानते हैं। पृथक होकर भी अपनी सुंदरता कायम रखना और बांटना जानते हैं। फूलों को किसने सिखाई ये संवेदना? कहाँ से आया उनके पास ये मन? सुशोभित धरा नहीं अर्पित हरश्रृंगार हैं जिनके पास धरा सा मन है। मन मन के पास ही पहुंचता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें