कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3869

भाषा / Language

पानी को तोड़ने

पानी को तोड़ने ... हवा को पकड़ने की जिद्द थी खुद में बारूद बोने का मन था मेरा..... शायद तुम्हारा भी। पहले मुहब्बत हम पर पड़ी फिर हम मुहब्बत में पड़ गए। * हम क्या करें मेरी जां...तुम क्या करो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें