कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3834

भाषा / Language

बहुत कम ऐसा होता है कि कोई इतना अगाध हो जाये।

बहुत कम ऐसा होता है कि कोई इतना अगाध हो जाये। मेरा मन भी तुम्हारे लिए ऐसा ही है....एक जैली पाउच सा। न टूटे न फटे बस सैंकड़ों बार आकार लेता रहे । दिल न भी रहे ..... दिलवाले बने रहने चाहिए। दुनिया चलती रहेगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें