कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3812

भाषा / Language

वो जो था ख़्वाब सा

वो जो था ख़्वाब सा ... क्या कहें.. जाने दें। अच्छी बारिश और खालिस प्रेम पर हक़ नहीं रखना चाहिए । वो सबके लिए ही होते हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें