भाषा / Language
एक ही सौंधी बात को हर मौसम में अलग अलग तरह से कह देना भी प्…
✦
एक ही सौंधी बात को हर मौसम में अलग अलग तरह से कह देना भी प्रेम है।
बने रहें .....
बातों में ही प्रेम है मेरा ।
तुम्हारी एक पंक्ति कितने दिनों तक जिला देती है कौन बता सकता है?
प्रेम के भुलावे भी ग़ज़ब हैं
भूल मत जाना....
बस इतने लिखे में....
हिदायत भी
आग्रह भी
आस भी
विश्वास भी
पीड़ा भी
अनुराग भी
अंश भी
दंश भी
रह भी
विरह भी
स्नेह भी
संदेह भी
मर भी
अमर भी
कल भी
सकल भी
आ भी
जा भी
भूल में रखा प्रेम सबसे ज्यादा फूल देता है।
देखो ऊपर कितने तो फूल खिले हैं ....तुम पर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें