कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम करना क्या है

प्रेम करना क्या है ? उसने पूछा मेरी प्रार्थना से निकल कर तुम्हारी प्रार्थना में संग चलना ... मैंने कहा क्या तुम मुझे प्रार्थना में पा जाती हो? उसने पूछा नहीं...तुम्हें याद करते ही मेरी प्रार्थना पूरी हो जाती है। मैंने कहा फिर उसने कुछ नहीं पूछा। दोनों हाथ आकाश को उठाए और मोह पाश साध लिया। मैंने भी मुस्कान के धनुक पर सात रंग से कविता रच दी... लिखा.... ये कैसा मोहभंग पिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें