कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3799

भाषा / Language

हाल मिल गया तुम्हारा अपने हाल से।

हाल मिल गया तुम्हारा अपने हाल से। मुस्कुरा दो... बस यही हासिल है...हमारा तुम्हारा हम एक दूसरे को यही देने के लिए बने हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें