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लोग कहते हैं प्रेम पलटता है

लोग कहते हैं प्रेम पलटता है .... पर सच तो ये है कि प्रेम न पदचिन्ह छोड़ता है ना ही पदचाप । अपने पैर पर पैर रखने का हुनर प्रेम भी नहीं सीख पाया। कम पड़ता ही पड़ता है अगर लौटे भी तो। प्रायः प्रेम निराश हो जाता है क्योंकि हम प्रश्न पूछते हैं। एक नहीं ...बहुत सारे अक्सर बेवजह प्रश्न अक्सर गलत प्रश्न आदि मध्य हो या अंत प्रेम पूछा या आंका जाना पसंद नहीं करता। प्रश्नों से परे प्रेम रचें प्रेम में पात्र खोजें ..... और देखें कि पात्र प्रश्न ना पूछते हों.... बेवजह गलत एक नहीं..बहुत सारे प्रश्न निराश प्रेम पनपता नहीं सूख जाता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें