भाषा / Language
सुख पर नहीं
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सुख पर नहीं....
मेरे दुःख पर मेरी मिल्कियत है।
मेरे पास खालिस आंसुओं के अलावा और कुछ भी नहीं तुम्हारे लिए।
एक दुःख ढोया जा सकता है ....
ताउम्र
मेरी आंखों ने चुना है तुमको दुनिया देखकर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें