कल्पनाशब्दों के बीच
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आवाज़ के बाजार में....... मौन हैं ये आंखें

आवाज़ के बाजार में....... मौन हैं ये आंखें मौन के लिबास में........... शोर हैं ये आंखें कह तो दिया... दिखा क्या ? तुमको
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें