कल्पनाशब्दों के बीच
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कितने ही रंगों का गुमान धर लो अपनी कहानियों में

कितने ही रंगों का गुमान धर लो अपनी कहानियों में .... फबते तुम कल्पना के रंग में ही हो । *खुरच के देखी आज फिर कुछ खामोशियाँ ..... सीली खामोशियों में फ़िक्र तेरी गीली खामोशियों में जिक्र तेरा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें