कल्पनाशब्दों के बीच
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तुमने कहा आसमान चाँद सूरज उगाने के लिए है। प्रेम का मचान न…

*तुमने कहा आसमान चाँद सूरज उगाने के लिए है। प्रेम का मचान न लगाओ। मैंने सुना....मेरे लिए होंठ मत जलाया करो...तुम्हारा मुझे बनाना ही बिगाड़ देना है। *तुमने कहा....कायम रहो। दूर....बहुत दूर मैंने सुना.... उदासी सबसे खूबसूरत फूल है। तुम पर अच्छा लगता है। *मैंने कहा.....अच्छे तो हो न? तुम ने सुना पर शायद मुझे अनसुना रखा रहने दिया.....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें