भाषा / Language
किताब के सफ़होँ के बीच फड़फड़ाहट कैसी
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किताब के सफ़होँ के बीच फड़फड़ाहट कैसी
दिन भर थे चुप .....शाम से सरसराहट कैसी
यादों का मोरपंख गीला हुआ है अभी अभी
ये तेरा सा अक्स .....ये तेरी सी आहट कैसी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें