कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम में पड़े रहने के लिए प्रेम ही नहीं अप्रेम भी चाहिए।

प्रेम में पड़े रहने के लिए प्रेम ही नहीं अप्रेम भी चाहिए। सब हरे दरख्तों पर पत्ता रुका रहे जरूरी तो नहीं। *दसो जी हूण की लिखिए? शाम भर से ये गीत कान में रस घोल रहा। रूहानी हूं। सुनिए आप । शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें