कल्पनाशब्दों के बीच
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स्त्री की हां..... एक सुंदर ठिठक है ।

स्त्री की हां..... एक सुंदर ठिठक है । स्त्री की ना.....एक खूबसूरत विराम इन दोनों के बीच तुम हो अनवरत सुख और असुख के बीच का दुःख है प्रेम ... इस त्रिकोण के दो ही कोण मान्य हैं... हमारा तुम्हारा तुम्हारा हमारा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें