भाषा / Language
मैं अपनी दो आँखों से पढ़ ही नहीं सकती तुमको
✦
मैं अपनी दो आँखों से पढ़ ही नहीं सकती तुमको .....
मुझे पृथ्वी से लेनी होगी वो दो आँखें जो हर खूबसूरती को समाहित करना जानती हों।
प्रेम आंखों से उतरकर उंगलियों में जम गया है। कागज़ की दरकार है।
*ठीक नौ साल पहले आज ही के दिन लिखना शुरू किया था ।शब्दों से इश्क वाला लव हो गया
खब्त रहेगी ।
जानती हूं मैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें