कल्पनाशब्दों के बीच
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इश्क़ जब जहां जैसे भी चला होगा शब्दों से होकर गुज़रा होगा।

इश्क़ जब जहां जैसे भी चला होगा शब्दों से होकर गुज़रा होगा। अक्षरों का संगीत ... बेहतरीन लिखना नहीं शोर से अतिरिक्त अक्षरों को घटा कर बस बहर में ला देना है। काश ..... एक रोज़ मैं अक्षर बीनना सीख जाऊं। *बेहद करीब से देखेंगे तो पाएंगे कि रोज़ हम सिर्फ अपने लिए ही लिखते हैं....फिर बस लिखते ही चले जाते हैं और एक दिन अपना ही लिखा यहां वहां रख कर भूल जाते हैं। याद वैसे भी आंसू से उपजी है ।इससे अक्षर कैसे बनाया जाय।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें