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नीली स्याही, कागज़, आकार ,नुसरत फतेह साहब और मैं

नीली स्याही, कागज़, आकार ,नुसरत फतेह साहब और मैं... पहली बार mandala art ट्राई किया। शाम कहां गुजरी ...कहां गई ... पता ना चला। सच है खुद के साथ बीत कर *नए* हो जाते हो... दूसरों के साथ बीत कर *गए* हो जाते हो। **तस्वीर अभी खींची है। शीशे में अक्स नज़र आ रहा। दिल खुश हो गया। विनोद की वाह मिली.... बोले तुम कोई क्लास क्यूं नहीं ज्वाइन कर लेती छुट्टियों में। मैंने मन ही मन कहा self learning is self healing too. U enjoy your limits and boundaries. Flying alone is precious and self explanatory.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें