कल्पनाशब्दों के बीच
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मां.... एक ठोस शब्द की जादूगरी ।

मां.... एक ठोस शब्द की जादूगरी । लिख लो ,देख लो ,सुन लो ,याद कर लो या छू भर लो... आप रुक नहीं सकते इसके वेग वात्सल्य के आगे। ये पिघलाएगा ही पिघलायेगा। तुम दोनों को बहुत प्यार। मुझे इस वेग वात्सल्य से भर देने के लिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें