कल्पनाशब्दों के बीच
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अगर आप सही हैं तो आपको बार बार शुरू होने में कोई उकताहट नही…

अगर आप सही हैं तो आपको बार बार शुरू होने में कोई उकताहट नहीं होती। आप जब जब शुरू होते हैं .... वहीं से लाइन लग जाती है। किस्से हवा में उड़ने लगते हैं। दीवानों की कतार लगती रहती है। लोगों की आंखों में दिखता है आपके लिए शुक्रिया। दो प्यारे लोगों को दिल से दुआ। तुमसे बहुत सीखा। तुमको बहुत सिखाया भी। तुम्हारा साथ याद रहेगा। आते रहना । मैं मुस्कुराती मिलूंगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें