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लिहाज़ एक गहरा लफ़्ज़ है

*लिहाज़ एक गहरा लफ़्ज़ है किस कदर ओछे हो दिखा जाता है। *जो जितना गहरा होगा उतना ही कम ख़ाली । *गहराई एक अजब खालीपन है । *बिना पाए खो देना भी सुख है । स्वाद बना रहता है और गंध भी ... इस चाहना की। हार साथ चलती है तो लगता है जिंदा हैं हम।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें