कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3616

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तेरे बिना मैं अधूरा लफ्ज़ हूं।

तेरे बिना मैं अधूरा लफ्ज़ हूं। रहूंगी सदा । *दो दिन की छुट्टी है। खूब सारा खुद से मिलने का समय है । भागती दौड़ती जिंदगी से पल निचोड़ कर खुद पर मलने का समय। कुछ न करने का समय ।बस आंख बन्द कर पसंदीदा गीत सुन रही। लय में बंधी कल्पना सुकून के धागे में लिपटी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें