कल्पनाशब्दों के बीच
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खो देने के लिए तुम भी थे पर मैंने खुद को चुना।

खो देने के लिए तुम भी थे पर मैंने खुद को चुना। तुम अभी कई लोगों से प्रेम किये जाने के लिए बाकी हो। लोगों को तुम्हारे प्रेम में पड़ कर साँस आती है। मैं तुम में अपना प्रेम उगा चुकी । तुम आओगे ... किसी बसंत किसी पतझड़ किसी धूप किसी सांझ जानती हूँ मैं मैं यहीं हूँ। अधखिली कलियाँ ... पूरी खिली प्रेमिकाएं हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें