भाषा / Language
खुद के भीतर उतरना चाहती हूं
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खुद के भीतर उतरना चाहती हूं....
साथ उड़ोगे क्या ?
*हम अपनी सीमा के पार जाते ही तब हैं जब पीछे छूटने को और आगे लूटने को कुछ न बचा हो।
हम खुद अपने पर काट कर ही उड़ते हैं...
*उदासी .......सबसे बड़ी ज़िद्द है।
मुझे तो लगती है .....खूबसूरत सी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें