भाषा / Language
मैं हमेशा कहती हूं किसी से मिलने के लिए केवल मन नहीं बनाना…
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मैं हमेशा कहती हूं किसी से मिलने के लिए केवल मन नहीं बनाना पड़ता जुगत लगानी पड़ती है। आवाज़ देनी पड़ती है। हाथ बढ़ाना पड़ता है।
आभासी दुनिया में कितने तो सारे चेहरे हैं ।किसको किसकी पड़ी है। सब अपने अपने में मगन हैं ।
पर कोई अगर मन बनाए और वाकई आपसे मिलना चाहे ...आपके संग कुछ पल इस भागती दौड़ती जिंदगी से चुरा कर बिताना चाहे तो मानिए वो इंसान वाकई आपकी कद्र करता है। आपको भी उसकी कद्र करनी ही चाहिए।
दूरियां शहर की होती जरूर हैं पर मन इसको उनके लिए ही पार करता है जिनसे आपका स्नेह हो । जो आपके मन के भी भीतर एक मन में दस्तक देते हैं।
प्रेम करना आसान है। प्रेम लौटाना बहुत जटिल।
आप किसी से मिलते हैं तो बहुत प्रेम लेकर लौटते हैं ।स्मृतियों में जगह पाते हैं। आभासी दुनिया से बाहर आपकी दोस्ती को पहचान मिलती है। आप शाश्वत नजर आते हैं आंखों के सामने।
इस कोशिश को हर कोई नहीं कर पाता। मैं हमेशा कहती हूं कम दोस्त हों पर खरे हों।
आपको जाया न करते हों।आपकी मौजूदगी को जश्न की तरह मानते हो।
आज मेरे स्कूल मुझसे मिलने दूर राजस्थान से मेरे मित्र और प्रिय कवि Naresh Gurjar और उनकी बेटी प्यारी सी पल्लवी आए। दुनिया इन जैसे प्यारे लोगों से खूबसूरत है।
खूब देर बातें हुई। किताबें आदान प्रदान हुई। दिन बेहद खास हो गया।
आपका मृदुल व्यवहार और आपका मेरे प्रति स्नेह ....अहा।
ईश्वर आप को और आपके परिवार को सारी नेमतें दे।
आप खरे खालिस मेरे दोस्त हमेशा रहें। आप की सादगी को किसी की नजर न लगे।
इतना सारा वक्त मुझे देने का शुक्रिया।
पल्लवी को अनंत शुभकामनाएं।
आते रहना।
दोस्ती की कद्र और प्रगाढ़ता मेरी तरफ से बनी रहेगी। वादा रहा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें