कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3601

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साथ

साथ..... जिस्म से रूह का इक सफ़र दोगे साथ? जगना सोना बेकार की बात जियोगे साथ? ख़्वाब में भी गर उदासी पसरे हंसोगे साथ? रुकना होगा तो हमेशा के लिए चलोगे साथ? मामला नहीं है मसला उम्र का बीतोगे साथ? एक ही ख़्वाब दस बार देखना उड़ोगे साथ? दूर पास फिर तो कुछ न होगा होगे साथ? समय की रेत तो धंस गए अगर बंधोगे साथ? खुदा के आगे अब तुमको रखा कहोगे साथ? भीड़ में गुम और गुम में हम ढूंढोगे साथ? पहाड़ों पर किस नाम का बादल देखोगे साथ? न कहा अभी न कहेंगे कभी सुनोगे साथ ? मैं बारिश तुम धूप सही चूमोगे साथ? मैं खो जाऊं तुम मिलो कभी रो लोगे साथ? *मुझे हमेशा आखिर में रखना जिसके बाद बाद न हो😊😊 शुभ दिन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें