भाषा / Language
प्रेम और मोह का इससे क्या लेना देना।
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प्रेम और मोह का इससे क्या लेना देना।
मैंने चाहा....
मैंने चाहा कि तुम्हारे नाम का वज्र पड़ जाए मुझ पर।
पड़ गया।
नदी का पानी से भी उतना ही मोह है जितना संग बहती रेत से प्रेम ।
समुंदर नाम का वज्र उसने प्रेम के खातिर खुद पर धर लिया है।
उसने चाहा
बस चाहा।
हां कह देने से अगर चुप्पी पसर जाती है ...शोर कम हो जाता है तो कह दो ना...
हां
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें