भाषा / Language
मैं बंद आंखों से गढ़ सकती हूं तुम्हारी आंखें
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मैं बंद आंखों से गढ़ सकती हूं तुम्हारी आंखें
हवा में कुछ देर उंगलियों को बागी ही तो होने देना है।
सुनो... तुम्हारे शहर का नक्शा है ही कहां
ये नक्श हैं
वो भी अफीमी अफीमी
ये आईना है या तुम हो.?
* वॉक करते हुए अभी बेहद रूमानी गीत सुनते हुए आफिमी हंसी भेजी है।
धानी धानी सी
झूम मुबारक
शुभ रात।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें