भाषा / Language
अपनी हंसी की मालकिन बनो।
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अपनी हंसी की मालकिन बनो।
वहीं बहो जिसके लिए भीगना और जिसे भिगोना चाहती हो...
चुनो... कहो ...
मन का
वर्ना निषेध रहो।
*लिखा मेरे आरसा पर है।
आज यहां लिख रही।
दुनिया भर की सभी हँसती सखियों को प्यार। तुमसे दुनिया रहने लायक है। खूब सीरत है।
तस्वीर शाम दक्षू ने ली हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें