गिरह भी तुम... गिरहगीर भी तुम... मैं तो बस मोह का धागा भई। शुभरात।
रचना 35306 मार्च 2022भाषा / Languageहिन्दीEnglishगिरह भी तुम✦गिरह भी तुम... गिरहगीर भी तुम... मैं तो बस मोह का धागा भई। शुभरात।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें