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तुम तक पहुंचना क्या मुश्किल है

तुम तक पहुंचना क्या मुश्किल है ? दराज़ में रखी हंसी पहन कर बस आईने तक तो जाना है। मैं उन आंखों के लिए लिखना चाहती हूं ...जिनकी अपनी अपनी प्रेम की जागीरें हैं। प्रेम वही देख सकता है जो खुद को किसी की आंखों में दिख जाने की कुव्वत रखता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें